Thursday, 25 March 2021

वेद भाष्य अशुद्ध

 

सत्यार्थ प्रकाश के इस लेखानुसार दयानन्द सरस्वती को सत्यर्थप्रकाश लिखने तक हिन्दी भाषा का शुद्ध ज्ञान नही था ।।
इसलिए सत्यार्थप्रकाश से पूर्व दयानन्द सरस्वती ने जो भी वेद भाष्य किये है
उनकी भी शुद्धता स्वीकार नही की जा सकती क्योंकि जहा तक मैं जानता हु की सत्यार्थ प्रकाश दयानन्द सरस्वती ने सबसे बाद मे लिखी ।।
तब तक उन्हें शुद्ध हिन्दी भाषा का ज्ञान नही था ।।
तो उससे पहले किये गए वेद भाष्य भी अशुद्ध है ।।
।। जय श्री राम ।

 
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या ते रुद्र शिवा तनूघोरा पापकाशिनी ।
तया नस्तन्वा शन्तमया गीरीशन्ताभि चाकशीहि ।।
यजुर्वेद 16-2
अर्थ -
हे रुद्रदेव ! आप अतिउच्च पर्वत की सुरक्षित गुफा मे रहते है । आप कल्याणकारी , शान्तरूप , शान्तरूप और पापो के विनाशक होने के कारण सौम्य और बलशाली भी है । अपने उसी मंगलमय रूप से हमारे ऊपर भी कृपा दृष्टि डाले ।।
ये लो वेदों मे साकार ईश्वर
आर्य समाजियों के मुह पर बड़ा वाला तमाचा
कोई कुतर्क करेगा अब भी ???

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