दयानंदभाष्य खंडनम् 

ये देखिए इस धूर्त को सत्यार्थ प्रकाश के अपने एकादश समुल्लास में ये बोलता है कि नानक जी को ज्ञान नहीं था
अब ज्ञान था या नहीं था मैं इस चक्कर में नहीं पडना चाहता।
परन्तु दुसरो का अपमान करने वाला , दुसरो को मुर्ख समझने वाला स्वयं कितना ज्ञानी है यह जानना जरूरी हो जाता है
आइए देखते है स्वामी जी कितने समझदार मतलब ज्ञानी थे उन्हीं के शब्दों में पढ़िए
अ) सत्यार्थ प्रकाश के नवम समुल्लास में स्वामी जी कहते हैं कि
आसमान का जो ये नीला रंग है वो आसमान में उपस्थित पानी की वजह से है जो वर्षता है सो वो नीला दिखता है
वो बात अलग है कि स्वामी जी की बुद्धि यही तक काम करती थी उन्होंने ये भी नहीं सोचा कि अगर पानी की वजह से आसमान नीला दिखाता है तो फिर बादलों में तो लबालब पानी भरा होता है फिर वो काले सफेद क्यों होते हैं
वो बात अलग है कि स्वामी जी को ये भी नहीं मालूम था कि पानी स्वयं रंगहीन हैं वो दुसरे के रंग में क्या परिवर्तन करेगा
वो बात अलग है कि स्वामी जी को यह भी नहीं पता था कि आसमान का नीला रंग सूर्य से आने वाली प्रकाश का पृथ्वी के वायुमंडल में उपस्थित गैसीय अणुओं से टकराने के कारण प्रकाश के परावर्तन के कारण दिखाई देता है
और यही प्रक्रिया समुद्र के जल के साथ होती है
ब) स्वामी जी की बुद्धि का एक नमूना और देखिए
स्वामी जी सत्यार्थ प्रकाश के अष्टम समुल्लास में लिखते हैं कि सूर्य, चन्द्रमा, तारे आदि जितने भी गोल पिण्ड, ग्रह आदि है उन सब पर मनुष्यआदि प्रजा रहती है
स्वामी जी को तो एक खगोलीय वैज्ञानिक होना चाहिए था क्या दिमाग पाया है सरकार बेकार में ही करोड़ों अरबों डॉलर सिर्फ ये जानने के लिए बेकार में खर्च कर देती है कि पडोसी ग्रह पर जीवन है कि नहीं ......
काश वैज्ञानिकों ने सत्यार्थ प्रकाश पढ़ी होती तो उनके ना केवल करोड़ों अरबों डॉलर का धन बचता साथ ही कई वर्षों का समय भी बेकार के प्रयोग में नहीं खराब होता
कमाल है यार एक अज्ञानी दुसरे की समझ पर उंगली उठा रहा है अपनी गिरेबान में ना झांककर उल्टा अपने एकादश समुल्लास में कहते हैं कि नानक जी को ज्ञान नहीं था
अरे स्वामी जी तो यही बता दीजिए की आपको क्या ज्ञान था पहले अपने आपको
ही देख लेते नानक जी का अपमान क्यों किया।
किसी ने सत्य ही कहा है एक मुर्ख को सारी दुनिया मुर्ख ही लगती है
-उपेन्द्र कुमार 'बागी'
!! जय श्री राम !!
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****** दयानंद जी ने कबीर और नानक साहेब को बताया अज्ञानी पाखंडी दम्भी, जुलायो को बताया नीच*******सत्यार्थ प्रकाश समुल्लास 11 पेज 246 पर..
प्रश्नकर्ता - कबीर पंथी जो बहुत अच्छे होते हैा??
दयानंद -- नही...
प्रश्न कर्ता कहता हैा जब ब्रह्मा विष्णु शिव नही थे तब कबीर साहेब थे.. जो बाते पुराण नही बता पाई वो बाते कबीर साहेब ने बताई.. कबीर साहेब फुल पर पैदा हुए और अन्त मे फुल बन गये...
दयानंद का उत्तर- क्या कबीर साहेब भुनुंगा था जो कलियो से उत्पन्न हुआ और अन्त मे फुल हो गया...एक जुलाया था वह काशी मे रहता था.. उसके बालक नही थे.. एक बार रात्रि को कही जा रहा था .. थोडी सी रात्रि थी एक टोकरी मे फूलो पर उसी रात का जन्मा बालक पडा मिला.. जुलाये ने उठा कर अपनी पत्नी को लाकर दे दिया.. जुलायो मे कबीर पला बडा किसी ब्रह्माण के पास संस्कृत सिखने गया .. किसी ने उसको नही सिखाया...उटपटांग भाषा बनाकर, जुलाये नीच लोगो को समझाने लगा, तम्बूरे लेकर गाने लगा , वेद शास्त्रो की निंदा किया करता था.. कुछ मूर्ख लोग उसके पीछे लग गये.. मरने के बाद लोगो ने उसको सिद्ध बना दिया..
.*** नानक जी के बारे मे सत्यार्थ प्रकाश समुल्लास 11पेज 247 पर दयानंद जी कहते हैा..
नानक जी का आशय तो अाशय तो अच्छा था पर ज्ञान कुछ नही था.. शास्त्रो और संस्कृत का कोई ज्ञान नही था.. चाहते थे संस्कृत मे भी टांग अडाऊ लेकिन बिना पढे संस्कृत कैसे आ सकती थी (दयानंद को संस्कृत तो ऐसी मिल गई जैसे चूहे को हल्दी की गांठ मिल गई चूहा पंसारी हो गया)दयानंद जी आगे कहते हैा जब कुछ अभिमान था तो दम्भं भी किये होगे.. क्योकि उनके ग्र्ंथ मे वेद शास्त्रो की निंदा आती हैा...क्या वेद पढने वाले मर गये जो नानक जी जैसे अमर हो गये क्या वो नही मर गये.. वेद सब विधाओ का भंडार है जो चारो वेदो को कहानी कहे तो उसकी सब बाते कहानी हैा जो मुर्खो का नाम संत होता हैा वो बिचारे वेदो की महिमा कभी नही जान सकते.. नानक जी अगर वेदो का सम्मान करते तो उनका सम्प्रदायना चलता वो गुरू नही बन पाते क्योकि गुरू बनने के लिए संस्कृत आती तभी अपने चेलो को पडा सकते थे.. तभी चेले बना पाते.
दयानन्द जी अपने बारवे संमुल्लास मे लिखते है
"बहुत मनुष्य ऐसे है जिन्हें अपने दोष तो नही दिखते
लेकिन दूसरे के दोषो को देखने मे अति उद्युक्त रहते है
यह न्याय की बात नही , क्योंकि पहले अपने दोष देख , निकाल के पश्चात दूसरो के दोष निकाले"
अब कोई कलंगी बताएगा की क्या ये बात दयानंद पर लागू नही होती ????
क्या ऐसा अन्यायी व्यक्ति महाऋषि की उपाधि के काबिल है ???


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