ईश्वर निराकार हैं क्योंकि उसका कोई आकार सीमित नहीं किन्तु वह सभी प्राणियों के रूप में जन्म लेता है।
वह परमातामा सभी दिशाओ उपदिशाओं जन्म लिये हुये तथा जन्म लेने के लिये तत्पर सभी प्राणियों मे संव्यापत है।वही जन्म लेकर पुन:पुन: जन्म लेने वाला है तथा वर्तमान में भी वही सर्वत्र विद्यमान है।
एषो ह देव:प्रदिशोनु सर्वा: पूर्वो ह जात:स उ गर्भे अन्त: स एव जात:स जनिष्यमाण: प्रत्यड्ं जनातस्तिष्ठति सर्वतोमुख:।।
३२/४यजुर्वेद

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