Thursday, 25 March 2021

पीली आँखोवाले

 

दयानंद पैदाइशी चुतिया
दयानंद यजुर्वेद ३०/२१ का भाष्य करते हुए लिखते हैं -
अग्नये पीवानं पृथिव्यै पीठसर्पिणं वायवे चाण्डालम् अन्तरिक्षाय वम्ँ शनर्तिनं दिवे खलतिम्ँ सूर्याय हर्यक्षं नक्षत्रेभ्यः किर्मिरं चन्द्रमसे किलासम् अह्ने शुक्लं पिङ्गाक्षम्ँ रात्र्यै कृष्णं पिङ्गाक्षम् ॥ (यजुर्वेद ३०/२१)
हे परमेश्वर वा राजन् !आप ..../ (पिङ्गलम्)- पीली आँखोवाले को उत्पन्न कीजिये, ......./ (चाण्डालम्)- भंगी को, (खलतिम्)- गंजे को, ....../ (कृष्णम्)- काले रंगवाले, (पिङ्गाक्षम्))- पीले नेत्रों से युक्त पुरूष को दूर कीजिये,
भावार्थ करते हुए लिखते हैं कि- भंगी के शरीर में आया वायु दुर्गंधयुक्त होने से सेवन योग्य नहीं इसलिए उसे दूर करें
समीक्षा- दयानंद का ये भाष्य पढ़कर इस बात में कोई संदेह नहीं रह जाता कि दयानंद पैदाइशी चुतिया है, दयानंद का ये भाष्य इस बात की पुष्टि करता है
पाठकगण ! ध्यान करें दयानंद पहले तो स्वयं लिखते हैं कि "हे परमेश्वर वा राजन् !आप ..../ (पिङ्गलम्)- पीली आँखोवाले को उत्पन्न कीजिये, फिर उसी पदार्थ के अंत में ऊपर लिखी बात के विरुद्ध लिखते है कि,
(पिङ्गाक्षम्))- पीले नेत्रों से युक्त पुरूष को दूर कीजिये,
अब पाठकगण ! स्वयं विचार करके बताए कि एक ही मंत्र में दो परस्पर विरुद्ध बातें लिखना, क्या दयानंद की बुद्धि पर प्रश्न चिह्न नहीं लगाता ?
दयानंद के भाष्यानुसार ईश्वर को क्या करना चाहिए, पिले नेत्रों वाले मनुष्यों को उत्पन्न करना चाहिए या नहीं,
उसी भाष्य में दयानंद लिखते हैं कि - (चाण्डालम्)- भंगी को, (खलतिम्)- गंजे को, ....../ (कृष्णम्)- काले रंगवाले, (पिङ्गाक्षम्))- पीले नेत्रों से युक्त पुरूष को दूर कीजिये,
पाठकगण ! स्वयं विचार करें भला ईश्वर भंगी, काले रंगवाले, और पीले नेत्रों वाले मनुष्यों को दूर क्यों करें ?,
क्या ये मनुष्य, मनुष्य की औलाद नहीं या इनकी सृष्टि ईश्वर द्वारा नहीं की गई, भला ईश्वर ऐसा क्यों करने लगे ?, जिन्हें स्वयं ईश्वर ने उत्पन्न किया वो उन्हें दूर क्यों करेंगे ?
हाँ दयानंद जरूर ऐसा सोचते होंगे शायद उन्हें ऐसे पुरुष अच्छे नहीं लगते हो जिसे उन्होंने अपने वेदभाष्यों में लिखकर, अपने मन में भरी घृणा को जगजाहिर किया, और लिखा कि "भंगी के शरीर में आया वायु दुर्गंधयुक्त होने से सेवन योग्य नहीं इसलिए उसे दूर भगावें"
दयानंदी हमें ये बताए कि यदि दयानंद के इस भावार्थानुसार लोग भंगी को सिर्फ इसलिए दूर कर दें क्योंकि उसके शरीर से दुर्गंधयुक्त वायु आती है
तो क्या उसके बदले भंगी का काम करने दयानंद का बाप आएगा ?,
दरअसल ये दयानंद के भंग की तरंग है भंग के नशे में मुहँ में जो अंड संड आया सो बक दिया, जो मन में आया सो लिख दिया, ऐसे भंगेडी के बातों का क्या प्रमाण ?,

 

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