* बच्चे पैदा करने के लिए स्त्रियों की रचना हुई है केवल ( मनुस्मुर्ती ९ : ९६ )
* स्त्रियो को भूमि और खेती के समान माना जाता है ! ( मनुस्मुर्ती ९ : ३३ )
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* वेदों के अनुसार स्त्री केवल संतान उत्पादन का यंत्र है
(ऋग्वेद 10 : 85 : 45 )
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हिन्दुइस्म के अनुसार स्त्रियाँ खेती है ?
* बच्चे पैदा करने के लिए स्त्रियों की रचना हुई है केवल ( मनुस्मुर्ती ९ : ९६ )
* स्त्रियो को भूमि और खेती के समान माना जाता है ! ( मनुस्मुर्ती ९ : ३३ )
* आत्मा वाली उपजाऊ धरती यह नारी आई है , हे नर उस स्त्री में बीज बो वह नारी पुरुष के दूध के जैसा वीर्य ( पानी ) को धारण करती है
और तेरे लिए बच्चे पैदा करे !
( अर्थर्वेद १४ : २ : १४ )
वेदो के अनुसार कितने बच्चे पैदा करे ?
* हे वर इस स्त्री को उत्तम पुत्र कर इसमें १० बच्चो को पैदा कर और ११ तू होजा !
( ऋग्वेद १० : ८५ : ४७ )
वेदो के अनुसार स्त्री बच्चे पैदा करने की मशीन
* वीर्य सींचने , वीर्य धारण करके स्त्री बच्चे के लिए योनि में वीर्य को धारण करे वीर्य सींचने पराक्रम करके बच्चे आपके संग पुत्रो का प्राप्त होवे !
( यजुर्वेद ८ : १० )
* भावार्थ : - स्त्रियाँ बच्चो को पैदा करे और आनंद प्राप्त करे !
Ved aur nari
* यह स्त्री पुरुष की कामना करती आई है और पुरुष स्त्रियों की कामना करता हुआ आया है जैसे हिंसता हुआ घोडा ! ( अर्थववेद २ : ३० : ५ ) घोड़े के जैसा पावर से करना चाहिए !
* पुरुष का लिंग स्त्री की योनि में प्रवेश करता हुआ वीर्य को छोड़ता है
( यजुर्वेद १९ : ७६ )
* हे मनुष्य स्त्री इस पति के सुन्दर अंग से सिर के साथ सिर मुँह में मुँह मिला और दोनों बच्चे पैदा करो ! ( यजुर्वेद १९ : ८८ )
* हे स्त्री आ और योनि में पुरुष का वीर्य प्राप्त करके बच्चे पैदा कर !
( यजुर्वेद १९ : ९४ )
* मेरी याद करके बीज के भाग में योनि अंडे की आकरमें सम्भोग का आनंद लेकर लिंग से द्वारा बच्चे पैदा कर ( यजुर्वेद २० : ९ )
* पुरुष के लिए बच्चे पैदा कर !
( अर्थवेद ४५ : २ : २४ )
* हे वधु तू प्रसन्न चित होकर ऊपर चढ़ और यहाँ इस पुरुष के लिए बच्चे पैदा कर ( अर्थवेद १४ : २ : ३१ )
* स्त्री को निश्चय करके प्राप्त हुई है और उन्होंने शरीर को शरीर से मिलाया है , हे ! नारी इस पुरुष के लिए बच्चे पैदा कर ! ( अर्थवेद १४ : २ : ३२ )
* तुम दोनों सम्भोग करो और बच्चे पैदा करो पुरुष स्त्री के ऊपर हो और बच्चे पैदा कर
( अर्थवेद १४ : २ : ३७ )
* हे पुरुष उस स्त्री को काम पर लगा जिस में मनुष्य लोग वीर्य डालते है जो हमारी कामना करती हुई दोनों जंघाओं को फैलाये और कामनापूर्ण करते हुए मजे ले ! ( अर्थवेद १४ : २ : ३८ )
* तूम जांघो के ऊपर आ हाथो का सहारा दे प्रसन्न चित होकर स्त्री गर्भाधारण करके बच्चे पैदा कर !
( अर्थवेद १४ : २ : ३९ )
Ved aur nari
* तूम दोनों बच्चे पैदा करो !
( अर्थवेद १४ : २ : ४० )
* जन नियंत्रण कानून कहते है यहाँ तो बच्चे पैदा करते रहो इतने बच्चे बच्चे सुन सुनकर मेरे आँखों के सामने बच्चे ही बच्चे नजर आ रहे है ?
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