वेदिक ईश्वर पगला गया है 😅
या तो वेदिक साइंटिस्ट लोग फिर से वेद रिफॉर्म करो ।
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वेदिक ईश्वर और वेड मांस खाने वाले लोगो के बारे में कया सोचते हैं
आओ जानते हैं 😅
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मांसभक्ष को मूल सहित भस्म कर दो। जो लोग मांस खाते हैं यानी मुस्लिम्स, ईसाई, हिंदू , इनलोगो को भस्म कर दो , खतम कर दो
(अथर्वेद 8:3:18)
, मुल्लो का माबलिंचिंग इसी वजह सै ही होते हैं ।
और यही वेदिक ईश्वर युजुर्वेद 13-49 पलटी मार के बोल रहा है की
नील गाय की हत्या कर दो 😅
Bcz नील गाय से खेत की और प्रजा को हानि होता है 😅
अब कोइ नील गाय को मार के खा जाए तो वेदिक ईश्वर
बहुत ही बड़े प्रॉब्लम में फस जायेगा!😅
यह सोच के की अब इसका कया करे 😅
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वेड में तो पशु हत्या दूर दूर तक नही हैं । 😅
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“मनुष्यों को उचित है कि जिनके मारने से जगत् की हानि और न मारने से सबका उपकार होता है, उनका सदैव पालन पोषण करें, और जो पशु तुम्हारे लिए लाभकारी न हों उनको मारें”॥४८॥
“हे (अग्ने) दया को प्राप्त हुए परोपकार राजन्, (ते) तेरे राज्य में, (आरण्यम्)- वन में रहने वाली, (गवयम्)- गौ जाति की नीलगाय से खेती की हानि होती है इस कारण, (तेन)- उसके मारने को, (अनुदिशामि)- उपदेश करता हूँ”
इसके भावार्थ में , वेदिक साइंटिस्ट दयानंद सरस्वती स्वामी जी लिखते हैं कि-- और गौ जाति से सम्बन्ध रखने वाली, गौ के समान दिखने वाली नीलगाय आदि जो जंगल में रहती है, उससे खेती की हानि होती है इसलिए वह मारने योग्य है,
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"हे मनुष्यों! जैसे बैल गौओं को गाभिन करके पशुओं को बढ़ता है, वैसे गृहस्थ लोग स्त्रीयों को गर्भवती कर प्रजा बढ़ावें"
वेदिक दार्शनिक लोग अब जानवर की तरह आपने बीवी से सेक्स कर के बच्चा पैदा करो 😅
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( सत्य वचन मांस खाना और चीजे वेद का एक अटूट अंग है जिस के बारे में मनु आदि ग्रन्थ से भी प्रमाण मिलता है परन्तु पशु हत्या ना करे ऐसा मंत्र जैन मत से लिया गया था नहीं तो इतिहास साक्षी है इन बातों का की ऋषिमुनि आदि बलि प्रथा और मांस सेवन किया करते थे जो आज भी करते नजर आते है बरहाल पूरी जानकारी के लिए 👇 )
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"हे मनुष्यों! जैसे बैल गौओं को गाभिन करके पशुओं को बढ़ता है, वैसे गृहस्थ लोग स्त्रीयों को गर्भवती कर प्रजा बढ़ावें"
वेदिक दार्शनिक लोग अब जानवर की तरह आपने बीवी से सेक्स कर के बच्चा पैदा करो 😅
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