पुनर्जन्म का सच
वेद और पुनर्जन्म
( यजुर्वेद 4 : 15 )
* अर्थात : - मनुष्यों को आयु फिर फिर प्रप्ति होती है , शरीर आधार फिर प्रप्ति होती है ,देखने के लिए आंखे , सुनने के लिए कान और पुनः शरीर प्रप्ति होती है ।
* उसी प्रकार से गीता में भी है , की जिस तरह मनुष्य कपड़े बदलता है उसी प्रकार आत्मा भी बारम्बार शरीर बदलती रही थी है और भी कई प्रमाण मिलते है ।
कर्म के अनुसार वेदों का ईश्वर किसी को , पशु , पक्षी किसी को लंगडा, किसी को लूला , किसी को रोगी , किसी को श्रेष्ठ , किसी को शुद्रो का जन्म देता है आदि आदि ।
आत्मा , परमात्मा और प्रकुति का चक्र यहाँ दखे
अब देखते है पुनर्जन्म का नियम
* पुनर्जन्म के नियम के अनुसार जब
भी किसी मनुष्य की मृत्यु हो जाती है , उसके
पश्चात सबसे पहले हवा में आवरो की तरह से गर्दिश करता है , उसके बाद नाले , नदी , झरने इत्यादी में रहता है , फिर उसके बाद खेती वगैरा में जाता है फिर उसके बाद धान्य इत्यादि में बसर होता , उसके बाद फिर धान्य आदि उत्पन्न होकर
भोजन की शक्ल में मनुष्य उसे ग्रहण करता है
उसके बाद उसके वीर्य्य में प्रवेश करता है , उसके बाद कोई पुरूष स्त्री के साथ संभोग ( सेक्स ) करता है उसके बाद वो गर्भ में जाता है ये सब हो कर मर ने वाले को पुनः शरीर की प्रप्ति होती है ।
पुनर्जन्म
अब देखते है कि किस को किस यौनि में जन्म मिलता है ?
* मनुष्य शरीर की प्रप्ति केवल उन्हें को प्राप्त होती है जो वेद को सत्य मानते है और वेदों की आज्ञा का पालन करते है उन्ही को मनुष्य यौनि में जन्म मिलता है ।
* ऐसा है क्या ? भला बताना की वर्तमान में केवल पूरे विश्व मे 3 -5 % लोगो ही वेदों को मानते है और जानते है और जो वेदों को नही मन्नते वही नास्तिक है ।
* मतलब पुनर्जन्म में केवल 3 - 5 % लोगो को
मनुष्य शरीर की प्रप्ति होगी ।
* और जो वेद आदि को नही मानते जिनको वेदों में मारने और काटने का हुक्म दिया है ।
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