वेद और आधुनिक विज्ञान
* मेरा काम वेदों के ऊपर प्रश्न चिन्ह लगाना नही बल्कि उन लोगो की बुद्धि का ताला खोलना है जो कि वेदों में ज्ञान विज्ञान की बाते करते नजर आते है कि वे भ्रम की जिंदगी व्यतीत कर रहे है । जो इनके पंडो ने बता रखा है । ये तो 100 % स्पष्ट है , की वेद न तो कोई ईश्वरीय ज्ञान , वाणी नही कोई ईश्वरीय ग्रन्थ ।
बल्कि कोई 2 पग पर चलने वाला हवस के पुजारी के लिखे हुए जिसने अपने स्वार्थ सिद्ध करने के लिए ऐसे कलंकित ग्रन्थ की रचना की , जिससे लोगो का आर्थिक , मानसिक एव शरीरिक शोषण किया जाए जिसका उदाहरण नियोग , मारकाट आदि आदि वेदों में भरा हुआ है ।
* आये देखते है ज्ञान विज्ञान के कुछ उद्धरण जो समझदारों के लिए इशारा काफी होगा ।
* यजुर्वेद का यह मंत्र कह रहा है , की सूर्य केवल अपनी ही परिधि में घूमता है अन्य किसी भी लोकांतकर के नही , इसमें भी गोल माल है ,ठीक है पल भर के लिए मान लेते है , की सत्य परंतु अर्थववेद क्या कह रहा है ?
* और यहाँ कह रहा है , सब लोको के चारो और घूमता है , ये है वैदिक ईश्वर का अधूरा ज्ञान इससे शिद्ध हुआ किया ये कोई ईश्वरीय ग्रन्थ नही बल्कि मानव रचित है ईश्वर के ज्ञान में कभी भी विरोधाभास नही होता केवल मानव के ज्ञान में ।
* कुछ और उद्धरण नीचे है जिससे और आपको स्पष्ट होगा मिथ्थाई ग्रन्थ वेदों के बारे में कही घूम रहा है , कही रोका हुआ , कही कुछ कही कुछ ।
* इसलिए कहा था कि ये पुस्तक मनोरंजन से भरी पढ़ी है यही वजह थी कि प्रचीन काल के लोग इससे व्यर्थ समझते थे और ये गधे इस में विज्ञान बताते है क्या मिथ्था है अगर ये सब जानने के बाद भी कोई ऐसा कहे वो महामूर्ख नही तो क्या होगा आप स्वयं ही बातए ।
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( अथर्वेद 6:77:1 )
* जिसमे भूमि, अंतरिक्ष और आकाश दृढ स्थापित है। (अथर्वेद 10:7:12)
* यजुर्वेद( 32:6 , 1:21 , )
अथर्वेद(13:1:6) में भी यही बाते लिखी है।
* सूर्य आदि लोको को रच कर और उसने सबको डोरी लगाकर बांद दिया है।
(अथर्वेद 4:1:4 )
अगर डोरी छोड़ दोंगे तो सब भाग जाएंगे क्या ?
* हे मनुष्य ! जो तेरा मन NOTE:-( चारो दिशाओं में भ्रंश वाली पृथ्वी पर)
( मतलब चार कोनो वाली पृथ्वी पर) दूर तक जाता है।( ऋग्विद 10:58:3)
* इस मंत्र में पृथ्वी को 4 कोनो वाली बताई गई है ।
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वेद और विज्ञान
* सभी मित्रों के लिए एक महत्वपूर्ण लेख ! जो वेदों के ज्ञान - विज्ञान बताते फिरते है उनके मुह पर एक तमाचा साबित होगा अर्थात विज्ञान के नाम पर गंदगी फैलाते नजर आते है और हैरत की बात तो ये है कि मूर्खो को तनिक भर भी लज्जा नही आती और कहते है , की ( NASA ) वेदों से पढ़ कर रिसर्च अर्थात खोज करता है जो कि एक बहुत बड़ा मिथ्था भाषण है जिसका कही से न तो सिर है ना ही पाव केवल स्वयं का ह्रदय प्रसन्न करते रहते है ।
बेचारे अंधकार में फसे है और मान बैठे है , की वास्तव में वेदों में ज्ञान - विज्ञान भरा हुआ है ।
वेद और ईश्वर
* मान लिया कि वेद ईश्वरीय ज्ञान है पर ऐसा अपूर्ण ज्ञान वैदिक ईश्वर को यह नही पता कि मैंने किस वेद में क्या ज्ञान दिया है और दूसरे वेद में क्या अर्थात यजुर्वेद में कुछ और कहा और अर्थववेद में कुछ वाह क्या ज्ञान है।
* कमाल है , वैदिक ईश्वर के ज्ञान पर प्रशन चिन्ह
( ? ) लगता है इसका अभिप्राय : यह है , की वेद मंत्रों में विरोधाभास है , जिसको पढ कर सर चकरा जाता है।
* की किस मूर्ख ने यह सब लिख दिया है कहि कुछ कही कुछ वेदों का ज्ञान विज्ञान की पुस्तक तो नही अपितु कामसूत्र एव मनोरंजन की पुस्तक कह सकते है जिसको देख कर केवल हंसी आए ये कोइ बात हम हवा हवाई नही बल्कि वैदिक धर्म के मानने वाले बड़े बडे प्रचीन वेदाभाष्यकर्ता स्वयं कहते है ,की वेद अर्थहीन है । आइए जानते है ?
लोकायत - मत
कर्मकाण्डी
1 . लोकायत मत : - के लोग तो मंत्र को इसलिए अर्थहीन मानते थे , की इनमें उल - जलूल बाते भरी पड़ी है , वेदों की कोई सत्ता नही इन्हें मानना व्यर्थ हैं ।
2 . कर्मकाण्डीयो : - का कहना था कि वेदों का कोई अर्थ नही किंतु उनका पाठ अनिवार्य है , पाठ करने में अर्थ का ध्यान नही रहता हम निष्ठा से पाठ करते है , क्योंकि यह हमारा धर्म है ।
* क्योंकि वेद अर्थहीन भले ही झाड़ फूंक करने के निर्रथक मंत्रो में ऐसा परिवर्तन किया की कार्यकारि शक्ति नष्ट हुई । क्या मिथ्था है , हंसी आती है ।
वेदमन्त्र में विरोधाभास
* वैदिक मंत्र इसलिए भी निरर्थक है , क्योंक की वे आपस मे ही विरोध करते है ।
उदाहरण ० कभी तो पृथ्वी केवल एक ही रुद्र है होने की बात करते है तो कही हजारों रुद्रों को ला बैठाते है
कभी इंद्र को जन्म से ही शत्रु हीन कहते है , कभी कुछ क्या खेल है ? यास्क फिर लौकिक प्रयोग के सामने सिर झुका देते है ।
* तो बड़े बड़े भाष्यकर्ताओ का मत है , की वेदों का कोई अर्थ ही नही और ये मूर्ख वेदों में ही विज्ञान की बाते करते है क्या मिथ्था से कम प्रतीत नही होता ।
वेद और आधुनिक विज्ञान
* मेरा काम वेदों के ऊपर प्रश्न चिन्ह लगाना नही बल्कि उन लोगो की बुद्धि का ताला खोलना है जो कि वेदों में ज्ञान विज्ञान की बाते करते नजर आते है कि वे भ्रम की जिंदगी व्यतीत कर रहे है । जो इनके पंडो ने बता रखा है । ये तो 100 % स्पष्ट है , की वेद न तो कोई ईश्वरीय ज्ञान , वाणी नही कोई ईश्वरीय ग्रन्थ ।
बल्कि कोई 2 पग पर चलने वाला हवस के पुजारी के लिखे हुए जिसने अपने स्वार्थ सिद्ध करने के लिए ऐसे कलंकित ग्रन्थ की रचना की , जिससे लोगो का आर्थिक , मानसिक एव शरीरिक शोषण किया जाए जिसका उदाहरण नियोग , मारकाट आदि आदि वेदों में भरा हुआ है ।
* आये देखते है ज्ञान विज्ञान के कुछ उद्धरण जो समझदारों के लिए इशारा काफी हो
* यजुर्वेद का यह मंत्र कह रहा है , की सूर्य केवल अपनी ही परिधि में घूमता है अन्य किसी भी लोकांतकर के नही , इसमें भी गोल माल है ,ठीक है पल भर के लिए मान लेते है , की सत्य परंतु अर्थववेद क्या कह रहा है
* और यहाँ कह रहा है , सब लोको के चारो और घूमता है , ये है वैदिक ईश्वर का अधूरा ज्ञान इससे शिद्ध हुआ किया ये कोई ईश्वरीय ग्रन्थ नही बल्कि मानव रचित है ईश्वर के ज्ञान में कभी भी विरोधाभास नही होता केवल मानव के ज्ञान में ।
* कुछ और उद्धरण नीचे है जिससे और आपको स्पष्ट होगा मिथ्थाई ग्रन्थ वेदों के बारे में कही घूम रहा है , कही रोका हुआ , कही कुछ कही कुछ ।
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कामसूत्र
सब को पता है की केवल वेद कामसुत्र और अश्लीता से भरा पढ़ा है और इसके अलावा कुछ नहीं
* वेद केवल सेक्स की पुस्तक है जिस से मनुष्य केवल बलात्कारी बन सकता है और ज्ञान - विज्ञानं से इस का दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं
कामसूत्र
ऋग्वेद १ : १३ : 5 में लिखा है की अंतरिक्ष पानी से भरा है यानि चंद्र , सूर्य आदि ग्रहो में पानी है और हर जगह क्या मिथ्या है
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वेद का ग्यान का भण्डार अओ जान
* सूर्य नीचे नीचे गिरता है , तो उठा लो
😊😊😊😊😊👌
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* कहते है कि वेदों में बहुत ज्ञान - विज्ञान भरा जिसका एक उदाहरण !
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