आर्य समाजियों द्वारा गुदा से सर्प उठाने और घोड़े के लिंग धारण करने के विज्ञान को जानिए।
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दयानन्द के अनर्थ
दोस्तों मैं एक मुसलमान हूं इसलिए मेरा फर्ज है समाज की गंदगी को खत्म करना इसलिए आर्य समाज नामी गंदगी को खत्म होना चाहिए जिसने समाज को गुमराह ...
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ईश्वर निराकार हैं क्योंकि उसका कोई आकार सीमित नहीं किन्तु वह सभी प्राणियों के रूप में जन्म लेता है। वह परमातामा सभी दिशाओ उपदिशाओं जन्म लि...
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संस्कार विधि में रजस्वला स्त्री के स्पर्श का भी निषेध। उसके हाथ का पानी भी नहीं पीना। आश्चर्य की बात है जहां आर्य समाजी रजस्वला स्त्रियों से...
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(वैदिक ईशवर) आज्ञा देता हूं, की तू मन, कर्म और शरीर से व्यभिचार कभी मत करो, किंतु धर्मपूर्वक विवाह और नियाग से संतानउतपन्न करते रहो।( वाह क्...
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