स्वामी दयानंद यजुर्वेद 25/7 में लिखते है....
हे मनुष्यों! तुम मांगने से पुष्टि करने वालो को स्थूल गुदेंद्रियों के साथ वर्तमान अंधेसर्पो को गुदेंद्रियों के साथ वर्तमान विशेष कुटिल सर्पो को आंतो से,जलों को नाभि के निचे के भाग से, अंडकोष को आंडो से,घोडे के लिंग और विर्य से संतान को,पित्त से भोजनों को, पेट के अंगो को गुदेंद्रिय और शक्तीयों से शिखावटों को निरंतर लेओं.
(यजुर्वेद 25/7 दयानंद-भाष्य)
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