क्या स्वामी दयानंद हस्तमैथुन करते थे.
सत्यार्थ प्रकाश मे स्वामी दयानंद माता-पिता बालक को कौनसी उत्तम शिक्षा करे इस विषय मे कहते है.
उपस्थेन्द्रिय से स्पर्श और मर्दन से वीर्य की क्षीणता, नपुंसकता होती है और हस्त में दुर्गंध भी होता है इससे उसका स्पर्श न करे. (सत्यार्थ प्रकाश,पृष्ठ 34)
स्वामी दयानंद को कैसे पता चला कि वीर्य में गंध कैसी होती है. अब या तो उन्होंने किसी दुसरे का वीर्य हाथ पर लेकर देखा होगा या फिर खुद हस्तमैथुन करके देखा होगा. शायद उन्हें ऐसा करने कि आदत पड गयी थी. और उनकी अम्मा ने उन्हें एक बार ऐसा करते हुए देखकर जोरदार डांट लगायी होगी. इसलिए उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश मे आर्य माताओं को हस्तमैथुन के विषय मे शिक्षा देने के लिए कहा है.
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