Friday, 28 August 2020

दयायनन्द के बारे में सनातनी।

दयानंद सरस्वती ने वेदों पर भाषा आदि पणयनकर एक नवीन विचारधारा को पुष्ट किया जो प्राचीन सनातन परंपरा से मेल नहीं खाती.

वेद कथाड्क पेज ऩबर 436

Thursday, 27 August 2020

गुदा से सर्प उठाना और घोड़े के लिंग धारण करना।

आर्य समाजियों द्वारा गुदा  से सर्प उठाने और घोड़े के लिंग धारण करने के विज्ञान को जानिए।

क्या स्वामी दयानंद हस्तमैथुन करते थे।

क्या स्वामी दयानंद हस्तमैथुन करते थे. 

सत्यार्थ प्रकाश मे स्वामी दयानंद माता-पिता बालक को कौनसी उत्तम शिक्षा करे इस विषय मे कहते है. 

उपस्थेन्द्रिय से स्पर्श और मर्दन से वीर्य की क्षीणता, नपुंसकता होती है और हस्त में दुर्गंध भी होता है इससे उसका स्पर्श न करे.  (सत्यार्थ प्रकाश,पृष्ठ 34) 


स्वामी दयानंद को कैसे पता चला कि वीर्य में गंध कैसी होती है.  अब या तो उन्होंने किसी दुसरे का वीर्य हाथ पर लेकर देखा होगा या फिर खुद हस्तमैथुन करके देखा होगा. शायद उन्हें ऐसा करने कि आदत पड गयी थी. और उनकी अम्मा ने उन्हें एक बार ऐसा करते हुए देखकर जोरदार डांट लगायी होगी. इसलिए उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश मे आर्य माताओं को हस्तमैथुन के विषय मे शिक्षा देने के लिए कहा है.

Thursday, 20 August 2020

पुनर्विवाह।

विधवा पुनर्विवाह।

स्वामी दयानंद ने केवल उस महिला से पुनर्विवाह की अनुमति दी है जिसने अपने पूर्व पति के साथ यौन संबंध नहीं बनाए हैं।



मनुस्मृति 6:176 में भी यही लिखा है।


ऋग्वेद 10-18-8 के आधार पर पुनर्विवाह सिद्ध करने वालों के लिए तर्क।


मनु ऐसे मामले मे पति और जन्मे बालक दोनो का विरोधी था


स्वामीजी ने पुनर्विवाह मे जो दोष निकाले है उनमे कोई दम नही है. 
1.पुनर्विवाह से स्त्री पुरुष मे प्रेम न्युन रहेगा तो नियोग में भी यह दोष है. जिस नियुक्त पुरुष से पुत्र मिला है स्त्री उसी से प्रेम करेंगी न।
2. पुराने पति के पदार्थ को उडा ले जाना या परिवार वालो के साथ झगडा करना नियोग के कारण भी हो सकता है.  आपके पास क्या गॅरंटी है कि स्त्री नियोग के लिए नियुक्त किये पुरुष के सेक्स पावर पर फिदा होकर पुराने पति के पदार्थ को लेकर भाग ना जाये ?  
3. रही बात पतिव्रता धर्म कि तो स्वामी जी बताये 10-10 पुरुषो से नियोग करके कौनसा पतिव्रता धर्म रहने वाला है ?

सत्यार्थ प्रकाश के कुतर्कों का उत्तर।
1. नियोग कि पुस्तकी कि व्याख्या तो हम भी जानते है लेकिन व्यावहारिक दृष्टी से यह संभव है ?  स्त्री अपने मरे हुये या नपुंसक पति जे ज्यादा प्रेम करेगी या उस पुरुष से जिससे उसे पुत्र प्राप्ती हुयी है ? स्त्री नियुक्त पुरुष से प्रेम नही कर सकती इसकी क्या गॅरंटी है आपके पास? क्या आपने किसी नियोग हुई स्त्री से पुछकर देखा है ?  
2.जब स्त्री नियुक्त पुरुष के साथ भागने का प्रमाण इतिहास मे नही है तो पुनर्विवाह करने वाली स्त्री पति के पदार्थ उडा ले जायेगी इसका कौसना ऐतिहासिक प्रमाण था स्वामी जी के पास ?
3. नियुक्त पति मे वो भावना नही रहती जो विवाहित पति मे होती है .. 
क्यों आपने पुछकर देखा है क्या?  नियुक्त पति हो या विवाहित पति विर्य स्खलन का आनंद तो उसे होने ही वाला है.  उस स्त्री को भी लिंग अंदर बाहर  होने पर आनंद मिल रहा है.  इसलिए यहा नियुक्त पति के मन मे क्या भावना है क्या नही इसे ज्यादा महत्व नही है।


चांडाल के शरीर दुर्गंधयुक्त।

चांडाल के शरीर में एक दुर्गंधयुक्त परमाणु है।

आर्य समाज का मत है कि स्वामी दयानंद किसी को भी जन्म से श्रेष्ठ नहीं मानते थे, लेकिन वे कर्म आधारित जाति व्यवस्था थे। कुछ आर्य समाजों ने दयानंद को दलित उद्धारकर्ता भी घोषित किया है।नजब आप सत्यार्थ प्रकाश पढ़ते हैं, तो आप नोटिस करेंगे कि स्वामी दयानंद का दलितों के प्रति रवैया क्या था। स्वामी दयानंद बताते हैं कि चांडाल के हाथ का खाना क्यों नहीं खाना चाहिए।

चाण्डाल का शरीर दुर्गंध के परमाणुओ से भरा हुआ होता है। वैसा ब्राह्मणादि वर्णो का नही. इसलिए ब्राह्मणादि उत्तम वर्णो के हाथ का खाएं और चाण्डालादि नीच, भंगी, चमार आदि का न खाएं। (सत्यार्थ प्रकाश,आर्ष साहित्य प्रचार ट्रस्ट, पृष्ठ 221, 222)



स्वामी दयानंद ने साबित किया है कि चांडाल के शरीर में एक दुर्गंधयुक्त परमाणु है, जो उन्हें लगता था कि उच्च और निम्न जन्म पर आधारित है।

Wednesday, 19 August 2020

व्यास अमरीका में।

स्वामी दयानंद सत्यार्थ प्रकाश, दशम समुल्लास पृष्ठ २१६ में महाभारत के समय के अमेरिका का उल्लेख है। 

व्यास अपने पुत्र और पुत्र के साथ अमेरिका में रह रहे थे।अर्जुन की शादी अमेरिका की एक लड़की से हुई थी। (सत्यार्थ प्रकाश, दशम समुल्लास देखें)



दयानन्द यजुर्वेद भाष्य।


स्वामी दयानंद यजुर्वेद 25/7 में लिखते है.... 

हे मनुष्यों! तुम मांगने से पुष्टि करने वालो को स्थूल गुदेंद्रियों के साथ वर्तमान अंधेसर्पो को गुदेंद्रियों के साथ वर्तमान विशेष कुटिल सर्पो को आंतो से,जलों को नाभि के निचे के भाग से, अंडकोष को आंडो से,घोडे के लिंग और विर्य से संतान को,पित्त से भोजनों को, पेट के अंगो को गुदेंद्रिय और शक्तीयों से शिखावटों को निरंतर लेओं. 
(यजुर्वेद 25/7 दयानंद-भाष्य) 

दयानन्द के अनर्थ

दोस्तों मैं एक मुसलमान हूं इसलिए मेरा फर्ज है समाज की गंदगी को खत्म करना इसलिए आर्य समाज नामी गंदगी को खत्म होना चाहिए जिसने समाज को गुमराह ...