विधवा पुनर्विवाह।
स्वामी दयानंद ने केवल उस महिला से पुनर्विवाह की अनुमति दी है जिसने अपने पूर्व पति के साथ यौन संबंध नहीं बनाए हैं।
मनुस्मृति 6:176 में भी यही लिखा है।
ऋग्वेद 10-18-8 के आधार पर पुनर्विवाह सिद्ध करने वालों के लिए तर्क।
मनु ऐसे मामले मे पति और जन्मे बालक दोनो का विरोधी था
स्वामीजी ने पुनर्विवाह मे जो दोष निकाले है उनमे कोई दम नही है.
1.पुनर्विवाह से स्त्री पुरुष मे प्रेम न्युन रहेगा तो नियोग में भी यह दोष है. जिस नियुक्त पुरुष से पुत्र मिला है स्त्री उसी से प्रेम करेंगी न।
2. पुराने पति के पदार्थ को उडा ले जाना या परिवार वालो के साथ झगडा करना नियोग के कारण भी हो सकता है. आपके पास क्या गॅरंटी है कि स्त्री नियोग के लिए नियुक्त किये पुरुष के सेक्स पावर पर फिदा होकर पुराने पति के पदार्थ को लेकर भाग ना जाये ?
3. रही बात पतिव्रता धर्म कि तो स्वामी जी बताये 10-10 पुरुषो से नियोग करके कौनसा पतिव्रता धर्म रहने वाला है ?
सत्यार्थ प्रकाश के कुतर्कों का उत्तर।
1. नियोग कि पुस्तकी कि व्याख्या तो हम भी जानते है लेकिन व्यावहारिक दृष्टी से यह संभव है ? स्त्री अपने मरे हुये या नपुंसक पति जे ज्यादा प्रेम करेगी या उस पुरुष से जिससे उसे पुत्र प्राप्ती हुयी है ? स्त्री नियुक्त पुरुष से प्रेम नही कर सकती इसकी क्या गॅरंटी है आपके पास? क्या आपने किसी नियोग हुई स्त्री से पुछकर देखा है ?
2.जब स्त्री नियुक्त पुरुष के साथ भागने का प्रमाण इतिहास मे नही है तो पुनर्विवाह करने वाली स्त्री पति के पदार्थ उडा ले जायेगी इसका कौसना ऐतिहासिक प्रमाण था स्वामी जी के पास ?
3. नियुक्त पति मे वो भावना नही रहती जो विवाहित पति मे होती है ..
क्यों आपने पुछकर देखा है क्या? नियुक्त पति हो या विवाहित पति विर्य स्खलन का आनंद तो उसे होने ही वाला है. उस स्त्री को भी लिंग अंदर बाहर होने पर आनंद मिल रहा है. इसलिए यहा नियुक्त पति के मन मे क्या भावना है क्या नही इसे ज्यादा महत्व नही है।