Saturday, 17 October 2020

स्त्री दशा।

ऐतरेय ब्राह्मण(3/24/27) के अनुसार वही नारी उत्तम है, जो पुत्र को जन्म दे। (35/5/2/४7) के अनुसार पत्नी एक से अधिक पति ग्रहण नहीं कर सकती, लेकिन पति चाहे कितनी भी पत्नियां रखे। आपस्तब (1/10/51/ 52) बोधयान धर्मसूत्र (2/4/6) शतपथ ब्राह्मण (5/2/3/14) के अनुसार जो स्त्री अपुत्रा है, उसे त्याग देना चाहिए। तैत्तिरीय संहिता(6/6/4/3) के अनुसार पत्नी आजादी की हकदार नहीं है। शतपथ ब्राह्मण (9/6) के अनुसार केवल सुंदर पत्नी ही अपने पति का प्रेम पाने की अधिकारी है। बृहदारण्यक उपनिषद् (6/4/7) के अनुसार अगर पत्नी संभोग करने के लिए तैयार न हो तो उसे खुश करने का प्रयास करो। यदि फिर भी न माने तो उसे पीट-पीटकर वश में करो। मैत्रायणी संहिता(3/8/3) के अनुसार नारी अशुभ है। यज्ञ के समय नारी, कुत्ते व शूद्र को नहीं देखना चाहिए अर्थात नारी व शूद्र कुत्ते के समान हैं। (1/10/11) के अनुसार नारी तो एक पात्र(बर्तन) के समान है। महाभारत(12/40/1) के अनुसार नारी से बढक़र अशुभ कुछ भी नहीं है। इनके प्रति मन में कोई ममता नहीं होनी चाहिए। (6/33/32) के अनुसार पिछले जन्म के पाप से नारी का जन्म होता है। मनुस्मृति(100) के अनुसार पृथ्वी पर जो कुछ भी है, वह ब्राह्मणों का है। मनुस्मृति(101) के अनुसार दूसरे लोग ब्राह्मणों की दया के कारण सब पदार्थों का भोग करते हैं। मनुस्मृति (11-11-127) के अनुसार मनु ने ब्राह्मणों को संपत्ति प्राप्त करने के लिए विशेष अधिकार दिया है। वह तीनों वर्णों से बलपूर्वक धन छीन सकता है अर्थात चोरी कर सकता है। मनुस्मृति (4/165-4/१६६) के अनुसार जान-बूझकर क्रोध से जो ब्राह्मण को तिनके से भी मारता है, वह 21 जन्मों तक बिल्ली की योनी में पैदा होता है। मनुस्मृति (5/35) के अनुसार जो मांस नहीं खाएगा, वह 21 बार पशु योनी में पैदा होगा। मनुस्मृति (64 श£ोक) अछूत जातियों के छूने पर स्नान करना चाहिए। गौतम धर्म सूत्र(2-3-4) के अनुसार यदि शूद्र किसी वेद को पढ़ते सुन लें तो उनके कान में पिघला हुआ सीसा या लाख डाल देनी चाहिए। मनुस्मृति (8/21-22) के अनुसार ब्राह्मण चाहे अयोग्य हो, उसे न्यायाधीश बनाया जाए वर्ना राज्य मुसीबत में फंस जाएगा। इसका अर्थ है कि वर्तमान में भारत के उच्चत्तम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री कबीर साहब को तो हटा ही देना चाहिए। मनुस्मृति (8/267) के अनुसार यदि कोई ब्राह्मण को दुर्वचन कहेगा तो वह मृत्युदंड का अधिकारी है। मनुस्मृति (8/270) के अनुसार यदि कोई ब्राह्मण पर आक्षेप करे तो उसकी जीभ काटकर दंड दें। मनुस्मृति (5/157) के अनुसार विधवा का विवाह करना घोर पाप है। विष्णुस्मृति में स्त्री को सती होने के लिए उकसाया गया है तो शंख स्मृति में दहेज देने के लिए प्रेरित किया गया है। देवल स्मृति में तो किसी को भी बाहर देश जाने की मनाही है। बृहदहरित स्मृति में बौद्ध भिक्षु व मुंडे हुए सिर वालों को देखने की मनाही है। 

गंगा से कांवड़ इसलिए लाई जाती है कि गंगा का पानी अपने स्थानीय शिव के मंदिरों में चढ़ाया जाए, जबकि हमारे धर्म शास्त्र कहते हैं कि गंगा तो शिवजी की जटाओं में रहती है। और दूसरे धर्मशास्त्र यह भी कह रहे हैं कि शिवजी तो कैलाश पर्वत पर रहते हैं। फिर यहां मूर्तियों पर गंगाजल चढ़ाने का क्या अभिप्राय: है? यह केवल एक हठयोग है। यदि पिंडदान करने से ही कोई स्वर्ग पहुंच जाता है तो आजकल के महाराज या भगवान लोगों को मोक्ष प्राप्ति के लिए किस आधार पर प्रवचन कर रहे हैं? यह काम तो केवल पिंडदान से ही हो जाएगा। मृत्यु भोज तो गिद्ध, लक्कड़बघ्घे, कब्वे व चील किया करते हैं। यह मानव का भोज कबसे हो गया?

 सत्यार्थ प्रकार के चौथे समुल्लास में पुनर्विवाह के संबंध में मनु के एक श£ोक का हवाला देकर यह सिद्ध कर दिया कि वे स्वयं भी इस पाखंडवाद अर्थात ब्राह्मणवाद से पीछा नहीं छुड़वा पाए थे क्योंकि वे मनु के ही एक श£ोक का समर्थन करते हैं कि यदि ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य वर्ण(द्विज) की लडक़ी, जिसका मुकलावा(गौणा) नहीं हुआ है और विधवा हो जाती है तो उसका पुनर्विवाह किया जा सकता है, अन्यथा नहीं। यदि शूद्र वर्ण की लडक़ी है, चाहे उसका गौणा हो चुका है, विधवा होने पर उसका पुनर्विवाह किया जा सकता है.
(आर्यसमाजी भाई, कृपया सत्यार्थ प्रकाश को ध्यान से पढ़ें)।

Friday, 28 August 2020

दयायनन्द के बारे में सनातनी।

दयानंद सरस्वती ने वेदों पर भाषा आदि पणयनकर एक नवीन विचारधारा को पुष्ट किया जो प्राचीन सनातन परंपरा से मेल नहीं खाती.

वेद कथाड्क पेज ऩबर 436

Thursday, 27 August 2020

गुदा से सर्प उठाना और घोड़े के लिंग धारण करना।

आर्य समाजियों द्वारा गुदा  से सर्प उठाने और घोड़े के लिंग धारण करने के विज्ञान को जानिए।

क्या स्वामी दयानंद हस्तमैथुन करते थे।

क्या स्वामी दयानंद हस्तमैथुन करते थे. 

सत्यार्थ प्रकाश मे स्वामी दयानंद माता-पिता बालक को कौनसी उत्तम शिक्षा करे इस विषय मे कहते है. 

उपस्थेन्द्रिय से स्पर्श और मर्दन से वीर्य की क्षीणता, नपुंसकता होती है और हस्त में दुर्गंध भी होता है इससे उसका स्पर्श न करे.  (सत्यार्थ प्रकाश,पृष्ठ 34) 


स्वामी दयानंद को कैसे पता चला कि वीर्य में गंध कैसी होती है.  अब या तो उन्होंने किसी दुसरे का वीर्य हाथ पर लेकर देखा होगा या फिर खुद हस्तमैथुन करके देखा होगा. शायद उन्हें ऐसा करने कि आदत पड गयी थी. और उनकी अम्मा ने उन्हें एक बार ऐसा करते हुए देखकर जोरदार डांट लगायी होगी. इसलिए उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश मे आर्य माताओं को हस्तमैथुन के विषय मे शिक्षा देने के लिए कहा है.

Thursday, 20 August 2020

पुनर्विवाह।

विधवा पुनर्विवाह।

स्वामी दयानंद ने केवल उस महिला से पुनर्विवाह की अनुमति दी है जिसने अपने पूर्व पति के साथ यौन संबंध नहीं बनाए हैं।



मनुस्मृति 6:176 में भी यही लिखा है।


ऋग्वेद 10-18-8 के आधार पर पुनर्विवाह सिद्ध करने वालों के लिए तर्क।


मनु ऐसे मामले मे पति और जन्मे बालक दोनो का विरोधी था


स्वामीजी ने पुनर्विवाह मे जो दोष निकाले है उनमे कोई दम नही है. 
1.पुनर्विवाह से स्त्री पुरुष मे प्रेम न्युन रहेगा तो नियोग में भी यह दोष है. जिस नियुक्त पुरुष से पुत्र मिला है स्त्री उसी से प्रेम करेंगी न।
2. पुराने पति के पदार्थ को उडा ले जाना या परिवार वालो के साथ झगडा करना नियोग के कारण भी हो सकता है.  आपके पास क्या गॅरंटी है कि स्त्री नियोग के लिए नियुक्त किये पुरुष के सेक्स पावर पर फिदा होकर पुराने पति के पदार्थ को लेकर भाग ना जाये ?  
3. रही बात पतिव्रता धर्म कि तो स्वामी जी बताये 10-10 पुरुषो से नियोग करके कौनसा पतिव्रता धर्म रहने वाला है ?

सत्यार्थ प्रकाश के कुतर्कों का उत्तर।
1. नियोग कि पुस्तकी कि व्याख्या तो हम भी जानते है लेकिन व्यावहारिक दृष्टी से यह संभव है ?  स्त्री अपने मरे हुये या नपुंसक पति जे ज्यादा प्रेम करेगी या उस पुरुष से जिससे उसे पुत्र प्राप्ती हुयी है ? स्त्री नियुक्त पुरुष से प्रेम नही कर सकती इसकी क्या गॅरंटी है आपके पास? क्या आपने किसी नियोग हुई स्त्री से पुछकर देखा है ?  
2.जब स्त्री नियुक्त पुरुष के साथ भागने का प्रमाण इतिहास मे नही है तो पुनर्विवाह करने वाली स्त्री पति के पदार्थ उडा ले जायेगी इसका कौसना ऐतिहासिक प्रमाण था स्वामी जी के पास ?
3. नियुक्त पति मे वो भावना नही रहती जो विवाहित पति मे होती है .. 
क्यों आपने पुछकर देखा है क्या?  नियुक्त पति हो या विवाहित पति विर्य स्खलन का आनंद तो उसे होने ही वाला है.  उस स्त्री को भी लिंग अंदर बाहर  होने पर आनंद मिल रहा है.  इसलिए यहा नियुक्त पति के मन मे क्या भावना है क्या नही इसे ज्यादा महत्व नही है।


चांडाल के शरीर दुर्गंधयुक्त।

चांडाल के शरीर में एक दुर्गंधयुक्त परमाणु है।

आर्य समाज का मत है कि स्वामी दयानंद किसी को भी जन्म से श्रेष्ठ नहीं मानते थे, लेकिन वे कर्म आधारित जाति व्यवस्था थे। कुछ आर्य समाजों ने दयानंद को दलित उद्धारकर्ता भी घोषित किया है।नजब आप सत्यार्थ प्रकाश पढ़ते हैं, तो आप नोटिस करेंगे कि स्वामी दयानंद का दलितों के प्रति रवैया क्या था। स्वामी दयानंद बताते हैं कि चांडाल के हाथ का खाना क्यों नहीं खाना चाहिए।

चाण्डाल का शरीर दुर्गंध के परमाणुओ से भरा हुआ होता है। वैसा ब्राह्मणादि वर्णो का नही. इसलिए ब्राह्मणादि उत्तम वर्णो के हाथ का खाएं और चाण्डालादि नीच, भंगी, चमार आदि का न खाएं। (सत्यार्थ प्रकाश,आर्ष साहित्य प्रचार ट्रस्ट, पृष्ठ 221, 222)



स्वामी दयानंद ने साबित किया है कि चांडाल के शरीर में एक दुर्गंधयुक्त परमाणु है, जो उन्हें लगता था कि उच्च और निम्न जन्म पर आधारित है।

Wednesday, 19 August 2020

व्यास अमरीका में।

स्वामी दयानंद सत्यार्थ प्रकाश, दशम समुल्लास पृष्ठ २१६ में महाभारत के समय के अमेरिका का उल्लेख है। 

व्यास अपने पुत्र और पुत्र के साथ अमेरिका में रह रहे थे।अर्जुन की शादी अमेरिका की एक लड़की से हुई थी। (सत्यार्थ प्रकाश, दशम समुल्लास देखें)



दयानन्द यजुर्वेद भाष्य।


स्वामी दयानंद यजुर्वेद 25/7 में लिखते है.... 

हे मनुष्यों! तुम मांगने से पुष्टि करने वालो को स्थूल गुदेंद्रियों के साथ वर्तमान अंधेसर्पो को गुदेंद्रियों के साथ वर्तमान विशेष कुटिल सर्पो को आंतो से,जलों को नाभि के निचे के भाग से, अंडकोष को आंडो से,घोडे के लिंग और विर्य से संतान को,पित्त से भोजनों को, पेट के अंगो को गुदेंद्रिय और शक्तीयों से शिखावटों को निरंतर लेओं. 
(यजुर्वेद 25/7 दयानंद-भाष्य) 

दयानन्द के अनर्थ

दोस्तों मैं एक मुसलमान हूं इसलिए मेरा फर्ज है समाज की गंदगी को खत्म करना इसलिए आर्य समाज नामी गंदगी को खत्म होना चाहिए जिसने समाज को गुमराह ...